ईद की शुभ कामनायेंईद क्या है.
ईद का मतलब होता है खुशी,खुशियां मानना.
अब सवाल होता है की खुशियां क्यों मनायें,
तो जिस प्रकार, एक देश आज़ाद होता है तो वह देश की
आज़ादी की खुशियाँ मनाता है. जब कोई स्टूडेंट अपने एग्जाम में कामियाब होता है तो वह
ख़ुशी मनाता है. इसी तरह मजहबे इस्लाम के मानने वाले रमजान के महीने में रोज़ा रखतें
हैं. रमज़ानुल मुबारक का एहतेराम करते हैं. जिन जिन चीजों से खुदा ने मना किया था उस
से वह रुक जाता है. तो रब फरमाता है लो अब इनाम मिलने का दिन आ गया. मेरे प्यारे बन्दे
तूने रमजान का रोज़ा रक्खा, सब कुछ मौजूद रहते हुए तुम मेरे लिए खाने, पीने , से रुके रहे , रातों में जाग कर
नमाज़ें अदा की , तुमने मेरी तमाम बातों को माना ,
मांगो क्या मांगते हो ?
रब फरमाता है, मेरे प्यारे बन्दे मुझसे
मानगो. आज जो चाहोगे मिलेगा. मरने के बाद के लिए कुछ चाहोगे तो सब मिलेगा।
और दुनिया के लिये कुछ चाहोगे तो वह मिलेगा जो तुम्हारे लिए अच्छा होगा. मेरी इज़्ज़त की
कसम, जब तक तुम मेरी बातों को मानते रहोगे मैं भी तुम्हारे गुनाहो
को माफ़ करता रहूंगा , जाओ तुम्हारे तमाम गुनाह माफ़ कर दिये गए , अब कोई भी गलत
काम न करना. जाओ तुमने मुझे राज़ी कर दिया और मै भी तुमसे राज़ी हो गया.
ईद किस के लिए है.
ईद उस खुशनसीब मुसलमानो के लिये जिसने रमजान का एहतेराम किया.
रोज़ा रक्खा. नमाजें अदा की. अल्ला और उसके रसूल की बातों को माना. प्यारे नबी मोहम्मद
(स/व ) फरमाते हैं कि वह आदमी मेरे ईदगाह से निकल जाये जिसने रोज़ा न रक्खा और न ही खुदा के आदेशों का पालन किया. ऐसा आदमी ईदगाह
की तरफ मत जाये।
नये कपड़े पहन लेने का नाम ईद नहीं।
नये कपड़े पहन लेने का नाम ईद नहीं।बल्कि असल ईद तो वह है जिसने
अपने आपको गुनाहों से बचा लिया. जो अपने माँ बाप की फरमाबरदारी कर के अपने खुदा को
राज़ी कर लिया. जिसने अपने माँ बाप
का दिल दुखाया, अपने पडोसी का दिल दुखाया,किसी को गलत बात कहा, किसी को गाली दी, चोरी किया, झूट बोला, लगाई बुझाई की, किसी का क़त्ल किया, ऐसे आदमी से न खुदा
ही राज़ी हुआ और न प्यारे नबी ही राज़ी हुए.
शहज़ादे
की ईद.
हज़रात सय्यदना उमर फ़ारूक़ (र/अ ) ने अपने बेटे को ईद के दिन पुराने
कपड़ों में देखा तो रोने लगे.
बेटे ने कहा , प्यारे अब्बू जान
, आप क्यों रो रहे हैं.
फ़रमाया. बेटे जब लोग तुमको इस फटे पुराने कपड़ों में आज ईद के दिन देखेंगे तो तुम्हारा
दिल टूट जायेगा।
बेटे ने कहा. अब्बू जान, दिल तो उसका टूटेगा जिस से उसके माँ बाप नाराज़ हों. अल्लाह और
उसका नबी नाराज़ हो. और मैने तो आप की खिदमत करके अल्लाह और उसके नबी को राज़ी कर लिया
है मुझे उम्मीद है की आप के तुफैल ज़रूर रब भी मुझसे राज़ी होगा।
ये सुन कर हज़रत फ़ारूक़े आज़म ने अपने बेटे को गले से लगा लिया और खूब दुआयें दीं।
ईद
के दिन कुछ बातों का रक्खें ख्याल.
बाल बनवाना ,नाखून तराशना. नहाना. अच्छे कपडे पहनना, इत्र लगाना. सुबह की नमाज मोहल्ले की मस्जिद में पढ़ना. ईदगाह
जाने पहले तीन ,पाँच , या सात खजूरें खा लेना. खजूर न हो तो कोई मीठी चीज़ खालें. ईदगाह
पैदल जाना। ईदगाह एक रस्ते से जाना और दुसरे रास्ते से आना. ईद की नमाज से पहले सदक़ा
फ़ित्र (जो गरीबों का हक़ है ) अदा कर देना, ख़ुशी ज़ाहिर करना. ज्यादा से ज्यादा गरीबों की मदद करना. एक दुसरे
को ईद की बधाई देना. ईदगाह जाते हुए अपनी नज़रें नीची रक्खें, और ज़बान पर ये
कलमा जारी हो. अल्लाहो अकबर अल्लाहो अकबर ला इला ह इल्लल्लाहो वल्लाहो अकबर , अल्लाहो अकबर
वलिल्ला हिल हम्द,
और
आखिर में.
लेकिन दोस्तों,
इस मर्तबा हम लोग कोरोना जैसी बीमारी की वजह से लॉकडाउन में
हैं और जान की हफ़ाज़त ज़रूरी है,
प्यारे नबी मोहम्मद (स/व)
ने फ़रमाया,जहाँ बीमारी फैली हो वहां के लोग दूसरी जगह न जाएँ ,और दूसरी जगह
के लोग वहां आने से बचें. इस लिए हम लोग इस मर्तबा ईद बड़ी सादगी से मनायें , कहीं पर भी भीड़
न लगायें,हाथ और गले मिलने से बचें,ज़बान से ही मुबारक बाद पेश
करें.अपने अपने घरों में ही ईद की नमाज सोशल डिस्टन्सिंग के साथ अदा करें और दुआ करें
की मेरा खुदा दुनियाँ के एक एक इंसान को इस जानलेवा बीमारी से बचाये. और तमाम देशों
से इस बीमारी को ख़त्म करदे. आमीन.
E-mail.hmrizwanamani@gamil.com

4 Comments
Masha allah
ReplyDeleteMasha allah
ReplyDeleteMash allah
ReplyDeleteMashaallah
ReplyDeleteHello guys, let me know how the post is. And do share it among your friends. Thank you,
हेलो दोस्त , पोस्ट कैसी लगी ज़रूर बताएं, और अपने दोस्तों में ज़रूर शेयर करदें. धन्यवाद I