प्रिय मित्रों,
हम ने रमजान और रोज़े के बारे में पिछले दो किस्तों
में पढ़ा कि माहे रमजान मुसलमानो के नज़दीक कितनी अहमियत और फ़ज़ीलत है. और रोज़ा रखने
के क्या क्या लाभ है.
अब हम माहे रमजान
अलविदा के बारे में जानेंगे.
अलविदा का मतलब होता है, विदा होना.यानि गुज़र जाना, जैसे कोई आप के पास आया, कुछ देर ठहरा, फिर चला गया, तो मतलब हुआ की वह
मुझसे अलविदा हो गया, यानि चला गया, बिलकुल ऐसे ही रमजान
शरीफ का महीना हमारे दरमियान आया और फिर गुज़र गया तो रमजान का महीना मुझ से अलविदा
हो गया।यानि चला गया.
रमजान शरीफ का महीना भी हमरे बीच आता है और फिर गुज़र जाता है
तो तमाम मुस्लिम रमजान शरीफ से रो रो कर यही कहते है , ए माहे मुबारक अलविदा.
अफ़सोस तू रुखसत हुआ
माहे मुबारक अलविदा।
अलविदा , ए अलविदा, माहे मुबारक अलविदा i
मुद्दत से थे हम मुन्तज़िर, माहे रमज़ां आया तो
फिर ,
पुर हैफ़ जल्दी चलदिया , माहे मुबारक अलविदा.
माहे रमज़ां
अलविदा
पूरी दुनिया के नबी हज़रात मोहम्मद (स/ व) ने इरशाद फ़रमाया, जब रमजान की आखरी
रात आती है तो ज़मीन, आसमान, और फरिश्ते , मेरे उम्मत की मुसीबत
को याद करके रोते हैं.
अर्ज़ किय गया, या रसूलल्लाह , कौन सी मुसीबत ?
फ़रमाया , रमज़ानुल मुबारक का
रुखसत होना. क्यों की इस में दुआओं को क़ुबूल किया जाता था , नेकीयों का बदला बढ़ा
दिया जाता है , दोज़ख के अज़ाब को दूर
कर दिया जाता है. रामज़ानुल मुबारक़ के विदा
हो ने से बढ़कर कौन सी मुसीबत हो सकती है.
रमजान के
ग़म में रोने का मर्तबा.
हदीसे पाक (इस्लाम धर्म की
बड़ी किताब )में लिखा हुआ है कि, जो आदमी रमजान शरीफ के आने पर खुश और रमजान शरीफ के जाने पर दुखी होता है, उस के लिए जन्नत है. और दुनिया से जब वह चला जायेगा तो अल्लाह
पर यह हक़ है कि उसे जन्नत में प्रवेश दे.
रमजान शरीफ
में एक रात.
माहे
रमजान में एक ऐसी रात भी है जिसमे रात भर जाग कर इबादत करना एक हज़ार महीनों की इबादत
से भी बेहतर है. उस रात को लै लतुल क़द्र कहते हैं. उस रात
की बहुत बड़ी फ़ज़ीलत है. उस रात में बड़े बड़े
गुनाहों को माफ़ किया जाता है. लेकिन 9 आदमी के गुनाह उस रात में भी माफ़
नहीं किये जाते.
वह 9 इंसान जिसके गुनाह रमजान के इस रात में भी माफ़ नहीं
होते.
01. वह अमीर आदमी जो अपने माल का ज़कात नहीं निकालते.
02. जो लोग किसी का क़त्ल कर देते हैं.
03. जो लोग अपने रिश्तेदारों से रिश्ता ख़त्म कर लेते हैं.
04. क़ब्रिस्तान में जाकर हंसने वाले.
05. जो एक-दूसरे के दिल में नफरत डालते हैं।
06. अपने शिक्षक को तकलीफ देने वाले.
07. नमाज़ में सुस्ती करने वाले.
08. तीन दिन से ज़्यादा अपने दिलों में कीना रखने वाले.
09. माँ बाप की नाफरमानी करने वाले.
जो इस रात
से महरूम रहा, वह पूरी भलाई से महरूम हो गया.
प्यारे नबी ने फ़रमाया,
तुम पर एक ऐसा महीना
आया है, जिसमे एक रात ऐसी
है , जो हज़ार महीनों से
बेहतर है. जो इस रात से महरूम रहा, वह पूरी भलाई से महरूम
हो गया. ऐसी रहमतों और बरकतों
वाली रात को गवां देना बहुत बड़े महरूमी की दलील है.
बहरहाल. हर इंसान
को चाहिए कि शबे क़दर की तलाश पूरे रमजान जारी रक्खे, कम से कम सत्तासवीं रमजान की रात को पूरी रात इबादत करे , नमाज़ पढ़े , क़ुरान शरीफ के तिलावत
करे , और पूरी रात जाग कर
इबादत में गुज़ारे,
और आखिर
में.
दुआ है अल्लाह पाक हम सभी
को रमजानुल मुबारक़ की इस बरकत वाली रात में ज़्यादा से ज़्यादा इबादत करने की तौफ़ीक़ अता
फरमाए. आमीन।
hmrizwanamani@gmail.com


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