Description
यह
लेख रमजान शरीफ के आखरी दस दिन के फ़ज़ाइल है,इस में पढ़ी जाने वाली दूआ,इस में पढ़ी जाने
वाली नमाज़ो और उस के फायदे और उसकी अहमियत को मुख़्तसर अंदाज़ में पेश किया गया.
लैलतुल क़द्र क्या है. ?
लैलतुल क़द्र का मतलब होता है " क़द्रो क़ीमत वाली रात"ऐसी रात जो बहुत ही क़ीमती हो। इस रात की इबादत को हज़ार महीनों की इबादत से भी बेहतर बताया गया है. बुखारी और मुस्लिम के हदीसे पाक में है कि जिसने इस रात में शब् बेदारी करके (रात भर जागकर ) इबादत में मशग़ूल रहा अल्लाह पाक उसके साल भर के गुनाह माफ़ कर देता है. लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिसके गुनाह इस रात भी माफ़ नहीं होते.
फ़ज़ीलते लैलतुल क़द्र।
लैलतुल क़द्र की फ़ज़ीलतो अहमियत के बारे में कलामे मोक़द्दस में पूरी एक सूरह नाज़िल की गई और बताया गया कि इसकी अहमियत और फ़ज़ीलत क्या है.
बिस्मिल्ला हिर्रहमा निर्रहीम
(01)इन्ना अन्ज़लनाहो फि लैलतुल क़द्र (बेशक हमने क़ुरान शरीफ को लैलतुल क़द्र में उतरा )
(02)वमा अद्रा क मा लैलतुल क़द्र (और तुम क्या जानो कि लैलतुल क़द्र क्या है)
(03)लैलतुल क़द्रे खैरुम्मिन अल्फे शहर (लैलतुल क़द्र हज़ार महीनो से बेहतर है.)
(04)तनज़्ज़लुल मलाई कतो वररुहो फ़ीहा बेइज़ने रब्बेहिम मिन कुल्ले अमर (इसमें फ़रिश्ते और जिब्रईल अलैहिस्सलाम उतरते हैं अपने रब के हुक्म से)
(05)सलामुन हिया हत्ता मत लाइलफजर्(सुबह के आने तक हर काम के लिए वह सलामती का पैग़ाम लाते हैं.)
वह कौन है जिसके गुनाह माफ़ नहीं होते ?
कुछ ऐसे बदनसीब लोग भी है जिसके गुनाह इस रात में भी माफ़ नहीं किये जाते. जैसे
(01) माँ बाप की ना फ़रमानी करने वाले.
(02) किसी इंसान का क़त्ल करने वाले।
(03) क़ता रहमी रिश्तों को तोड़ने और आपस में कीना रखने वाले.
(04) माल का ज़कात नहीं देने वाले.
(05) क़ब्रिस्तान में जाकर हंसने वाले.
(06) अपने गुरु जी को तकलीफ देने वाले.
(07) नमाज़ में सुस्ती करने वाले.
(08) लगाई बुझाई करने वाले
(09) तीन दिन से ज्यादा आपस में कीना रखने वाले.
किसे कहते हैं अशरा ?
रमज़ानुल मुबारक्, जो इस्लामी साल का नौवाँ महीना है, इस महीने के पुरे माह में मुस्लिम क़ौम रोज़े(fasting)से रहती है. और इस माह का बड़ा ही अदबो एहतेराम हदीसों में आया है. सो इस माह को तीन भागो में बांटा गया है. जिसे तीन अशरह कहते है. अशरह के मानी दस होते है. तो पहला अशरह रहमत का होता है. दूसरा अशरा मग़फ़िरत का और तीसरा अशरह जहन्नम से आज़ादी का अशरा कहलाता है.
तीसरे अशरे में क्या होता है. ?
रमजान शरीफ के आखरी दस दिन को ही तीसरा अशरा कहा जाता है. इसी तीसरे अशरे में पाँच रातें 21,23,25,27,और 29 ऐसी रातें है जिन्हे लैलतुल क़द्र या शबे क़द्र कहते है.लेकिन इस्लामिक विद्यावानो का मानना है की लैलतुल क़द्र में नौ (9)हुरूफ़ है और यह लफ्ज़ सूरह क़द्र में तीन (3)बार आया है जिससे 27 हासिल हुए इससे साबित होता है की लैलतुल क़द्र 27वीं शब् को ही है.
मुफ़स्सेरीन केराम लिखते हैं कि इस रात में अल्लाह तबारको त आला ने क़ुरान शरीफ को लौहे महफूज़ से पहले आसमान पर नाज़िल फ़रमाया और फिर तक़रीबन 23 साल की मुद्दत में अपने प्यारे हबीब मोहम्मद सल लल्लाहो अलैहे वसल्लम पर धीरे धीरे नाज़िल किया। इस रात की इबादत्त को एक हज़ार महीने की इबादत्त से भी अफ़ज़ल क़रार दिया गया. एक हज़ार महीनो के 83 साल 4 महीने होते है। यानी जिसने ज़िन्दगी में सिर्फ एक बार भी शबे क़द्र में रात भर जाग कर इबादत्त की तो गोया उसने 83 साल 4 माह से भी ज़्यादा अरसा तक इबादत्त में मशगूल रहा.
शबे क़द्र में किस दूआ को ज्यादा पढ़ें ?
प्यारे नबी ने फ़रमाया अगर कोई शबे अक़्दर को पाए तो इस दूआ को बार बार पढ़े.
अल्ला हुम्मा इन्न क अफुव्वुन तोहिब्बुल अफवा फाफू अन्नी (ऐ अल्लाह बेशक तू माफ़ करने वाला है, और माफ़ करने को पसंद भी करता है,इसलिए मुझे भी माफ़ फरमा दे।
शबे क़द्र में पढ़ने वाली नमाज़,
बेहतर है की जो नमाज़ हमारी क़ज़ा हैं, छूटी हुई हैं उसे ही अदा करें, अगर क़ज़ा नमाज़ें नहीं है तो नवाफिल अदा करें, कलामे मोकद्दस की तिलावत करें,ज़िक्रो अज़कार में मशग़ूल रहे. अल्लाह पाक से अपने गुनाहों की मग़फ़िरत की दूआएं मांगें,और नफिल नमाज़ों की कुछ तरकीबें है जो हमारे बुज़ुर्गाने दीन पढ़ी हैं उस तरकीब से नवाफिल भी अदा करें जैसे.
(01)
चार रकअत नमाज़े नफिल की नियत करें और हर रकअत में सूरा फातेहा (अल्हम्दो)के बाद एक बार सूरा क़द्र (इन्ना अन्ज़लना ) पढ़ें और 27 बार सूरा अख़्लास (कूल्हो वल्ला) को पढ़ें, और नमाज़ के बाद दूआ मांगे, तो बंदा अपने गुनाहों से ऐसा पाक हो जाता है जैसे अभी वो माँ के पेट से पैदा हुआ है.
(02)
दो रकअत नमाज़े नफिल की नियत करे हर रकअत में सूरा फातेहा के बाद 7 मर्तबा सूरा अख़लास पढ़े और सलाम फेरने के बाद 70 मर्तबा (अस्तग़फि रुल्लाह व अ तुबु इलैह ) पढ़े तो अपनी जगह से उठने से पहले अल्लाह त आला उसको और उसके वालेदैन (माता पिता ) के गुनाहों को माफ़ कर देता है.
(03)
और अंत में
(04)
अल्लाह पाक हम तमाम लोगो को रामज़ा नुल मुबारक के मोकद्दस महीने और लैलतुल क़द्र के फुयूज़ो बरकात हासिल करने की तौफ़ीक़े रफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।
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