Description
असल
ईद क्या है.? कैसे मनायें ईद ? आम माफ़ी का एलान. शैतान की बदहवासी।,सय्यदना फ़Iरूक़े आज़म
ने ईद कैसे मनाई,बादशाहों की ईद.
रमज़ानुल
मुबारक के मुशक्क़त भरे तीस रोज़ों के बाद जो ईद का चाँद निकलता है तो उसकी ख़ुशी का एहसास
किसी ईमान वाला ही महसूस कर सकता है. जिस खुदा ने एक माह तक दिन में खाने पीने से रोके
रक्खा था अब वही खुदा फरमाता मेरे बन्दों जाएज़
चीज़ों में से जो चाहो खाओ पीओ और खूब खुशियां मनाओ.
खुशियाँ मानाने का दिन
आज ईद का दिन है , खुशियाँ मानाने का दिन है. आपस में इत्तेहाद,मेल और मोहब्बत को बढ़ावा देने का दिन है. दोस्त और दुश्मनों को गले लगाने का दिन है. हमारे खलिको मालिक,हमारे परवरदिगार ने मुसलमानो की भलाई और उसकी सेहतो तंदरुस्ती का ख्याल रखते हुए उसका इम्तेहान लिया था फ़रमाया था, देखो तीस दिन तक सुब हे सादिक़ (भोर ही से)खाना पीना बंद कर देना और जब सूरज डूब जाये तब कुछ खाना,मुसलमानो ने ऐसा ही किया सुबह से शाम तक लगातार तीस दिन तक खाना पीना बंद कर दिया,हालाँकि घर में सब कुछ मौजूद था ठंडा पानी भी मौजूद था,फल फुरुइट भी मौजूद थे लेकिन मुसलमानो ने अपने रब के हुक्म की तकमील की और मुसल्लम ईमान वाला होने का सुबूत पेश किया.ऐसे ही बन्दों से खुश होकर रब त आला ने ईद सईद की खुशियां मानाने की इजाज़त बख्शी और फ़रमाया.
आम मोआफी का एलान
रब फरमाता है ऐ मेरे बन्दों मांगो,मांगो क्या मांगते हो. मेरे इज़्ज़तो जलाल की कसम आज ईद के दिन जो कुछ भी मांगो गे दूंगा जब तक तुम मेरा लेहाज़ करोगे मैं भी तुम्हारी खताओं पर पर्दा पोशी करूँगा, मैं तुम्हे मुजरिमों के साथ रुस्वा न करूँगा. नमाज़े ईद अदा करने के बाद अपने घरों की तरफ लौट जाओ मैंने तुम्हारे तमाम गुनाहों को मआफ कर दिया.
शैतान की बदहवासी
ईद के दिन शैतान चिल्ला चिल्ला कर रोता है. इसकी बदहवासी देख कर शैतान के तमाम चेले उसके इर्द गिर्द जमा हो जाते है और पूछते हैं, आक़ा क्या हुआ , आप इस क़दर परीशान क्यों है. वो कहता है हाय अफ़सोस अल्लाह तआला ने आज के दिन तमाम मुसलमानों के गुनाहों को बख्श दिया, इस लिए तुम लोगो से ये कहता हूँ की फ़ौरन जाओ और तमाम मुसलमानो को ख़ाहिशाते नफ़्सानी में मशग़ूल करदो।
असल ईद क्या है ?
लैसल ईद,लेमन लबिसल जदीद (ईद उसकी नहीं है जिसने नये कपडे पहन लिए हों.)
इन्ना मल ईद , लेमन खाफल वईद (ईद तो उसकी है जो गुनाहों से सच्चे दिल से तोबा कर लिया.)
मुस्लिम बादशाओं की ईद
ईद का दिन था, उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ जो अमीरुल मोमेनीन थे. बादशाहे वक़्त थे,उन की बेटियां अपने वालिद से बोलीं, अब्बू जान, कल तो ईद है. बताएं हम कौन से कपडे पहनेंगे,बादशाहे वक़्त ने अपने बेटियों से फ़रमाया,बस यही कपडे जो आपने पहन रक्खे है. इन्हें धोकर साफ़ करलें कल ईद के दिन पहन लेना.
बच्चियों ने ज़िद की नहीं बाबा जान, आप हमें नए कपड़ें बनवादें ,
आप ने फ़रमाया बच्चियों ईद का दिन अल्लाह की इबादत करने और उसका शुक्र बजा लाने का दिन है. नए कपडे पहनना ज़रूरी तो नहीं.
बच्चियों ने कहा अब्बू जान आप का फरमाना बेशक दुरुस्त है, लेकिन हमारी सहेलियां हमें ताना देंगी की बादशाह की बेटी होकर वही पुराने कपडे पहिन रक्खे है.
ये कहते हुए बच्चियों के आँखों में आंसू भर आये.
बेटियों की बातें सुन कर अमीरुल मोमेनीन का दिल भर आया. आँखों से आंसू छलक पड़े।
आपने खाज़िन (ख़ज़ाने का मालिक)को बुलाकर फ़रमाया. मुझे एक माह की तनखाह (वेतन) पेशगी (एडवांस)देदो ताकि मैं ईद के लिए बच्चो का कपड़ा बनवा सकूं.
खाज़िन ने कहा, हुज़ूर क्या आप को यकीन है कि आप एक माह तक ज़िंदा रहेंगे.?
आप ने फरमाया (जज़ा कल्लाह) बेशक तुम ने उम्दा और सही बात कही। खाज़िन चला गया.
आप ने फ़रमाया मेरी बच्चियों अपनी खाहिशात को अल्लाह की रज़ा के लिए क़ुर्बान करदो.
और बेटियाँ ख़ामोशी से अपने घर की तरफ चलदीं।
ये है हक़ीक़ी मुसलमानों की ईद.
सय्यदना फ़ारूक़े आज़म की ईद.
ईद का दिन है, लोग ईद की मुबारक बाद देने फ़रूक़े आज़म के दरवाज़े पर खड़े है. और एक बादशाहे वक़्त हज़रत फ़ारूक़े आज़म है. जो अपने घर का दरवाज़ा बंद कर के ज़ारो क़त्तार रो रहे है.
लोगों ने हैरान होकर ताज्जुब से आवाज़ दी. या अमीरुल मोमेनीन आज तो ईद का दिन है. फ़रहतो शादमानी और खुशियाँ मानाने का दिन है. और एक आप हैं कि रोये जा रहे है.
आपने आंसू पोछते हुए फ़रमाया। हाज़ा यौमुल ईद, व ,हाज़ा यौमुल वईद (आज ईद का दिन भी है और वईद का दिन भीं है.)
जिसके नमाज़ रोज़े तरावीह,तिलावते क़ुरान,आमाले नेक, बारगाहे खुदा वन्दी में क़ुबूल हो गए यक़ीनन उसके लिए ईद का दिन है. और जिसके नमाज रोज़े मरदूद करके उसके मुंह पर पर मार दिए गए उसके लिए तो आज वईद का दिन है.
अना ला अदरी अमिनल मक़्बूलीन, अमिनल मतरूदीन (और मुझे ये मालूम नहीं की मैं मक़बूल हुआ हूँ या रद्द कर दिया गया हूँ.
इस तरह हमारे मुस्लिम क़ौम के रहनुमाओं ने ईद मनाई. और दीने इसलाम के परचम को बुलंद किया. आमीन
रब से है यही इल्तेजा
बारगाहे खुदा वन्दी में अर्ज़ है कि मौला हमें रमज़ानुल मुबारक के मोकद्दस महीने के सदके तुफैल हमें ईद के दिन और सालो भर गलत कामो में मुलव्विस होने से बचा.और हमेशा नेक अमल करने की तौफ़ीक़े रफ़ीक़ अता फरमा, अमीन बजाही सय्यदुल मुर्सलीन. सल लल्लाहो अलैहे वसल्लम.
ईद पर दो शेर .....
ईद का दिन है गले मिल ले भाई
रस्मे उल्फत भी है,मौक़ा भी है,दस्तूर भी है.
ईद के दिन सब मिलेंगे अपने अपने
यार से.
हम गले मिल के रोयेंगे दरो दीवार से।

0 Comments
Hello guys, let me know how the post is. And do share it among your friends. Thank you,
हेलो दोस्त , पोस्ट कैसी लगी ज़रूर बताएं, और अपने दोस्तों में ज़रूर शेयर करदें. धन्यवाद I