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ISLAM DHARM ME KHATNA(इसलाम धर्म में खतना)

 


प्रस्तावना,

यह लेख इस्लाम धर्म में खतना (पुरूष के प्राइवेट पार्ट के बढ़े हुए चमड़े को काटना) के महत्व एवं फ़ायदा और नुकसान (लाभ एवं हानि )के बारे में बताया गया है।  उम्मीद है कि यह लेख ज्ञान पूर्वक होगा. धन्यवाद,

इस्लाम में खतना

खतना सुन्नते रसूल है. और मुस्लिम होने की एक पहचान है. इसे मुसलमानी भी कहा जाता है. प्यारे नबी हज़रात मोहम्मद सल्लल लाहो अलैहे वसल्ल्म ने फ़रमाया " हज़रात इब्राहीम खलीलुल्लाह अलैहिस्सलाम ने अपना खतना उस वक़्त कराया जब उनकी उम्र अस्सी (80) साल की थी."

खतना क्या है.?

खतना कहते है  लड़के के प्राइवेट पार्ट के फालतू चमड़े को काट कर हटा देना. और यह केवल लड़कों के लिए है.

सब से पहले किस का हुआ खतना ?

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अस्सी (80) वर्ष की आयु में अल्लाह पाक के हुक्म से सब से पहले इस काम को किया और खानदान के तमाम मर्दों को हुक्म दिया के खतना कराये। 

किस उम्र में हो खतना.?

सात वर्ष से बारह वर्ष के बीच खतना कराने को बेहतर आयु माना गया है. लेकिन कुछ इस्लामिक विद्यवानो ने यह भी कहा है कि बच्चे के पैदाइश के सातवें दिन करालेने में भी कोई हर्ज नहीं है.

बूढा आदमी कैसे कराये खतना. ?

ऐसे आदमी के लिए मसला यह है कि अगर वह बूढा है और बुढ़ापे के कारण वह  खतना कराने की ताक़त नहीं रखता तो उस के लिए खतना कराना कोई ज़रूरी नहीं है.

जवान आदमी कैसे कराये खतना. ?

और अगर जवान आदमी है तो अगर वह खुद अपने हाथ से खतना करने की हिम्मत रखता है तो करले, वरना कोई ज़रूरी नहीं है. हाँ अगर कोई ऐसी औरत हो जो खतना करना जानती हो तो वह उस से शादी करले,अब जबकि वह औरत उस की बीवी हो चुकी है तभी वह उस से खतना करा सकता है वरना नहीं कराये, खतना कराना बहुत ज़रूरी भी नहीं है.और न ही मुसलमान होने के लिए शर्त है.

दुसरे आदमी से खतना इस लिए नहीं करा सकता क्योंकि इसलाम में दुसरे के प्राइवेट पार्ट को देखना छूना बिलकुल नाजायज़ और हराम है /.

खतना क्यों है ज़रूरी. ?

मज़हबे इसलाम ने खतने का हुक्म देकर प्रइवेटपार्ट की बहुत सारी खतरनाक  बीमारियों का दरवाजा हमेशा के लिये बंद कर दिया है. जैसे। ......

  1. खतना से मर्द, गैर जरूरी हवस और गंदे विचार से बच जाते है,
  2.    अगर खतना न किया जाय तो पेशाब की बंदिश और गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन्स )का खतरा मौजूद रहता है.
  3. चंद खतरनाक बीमारियों के कीटाणुओं प्रइवेटपार्ट के चमड़े में फँस कर अंदर ही अंदर बढ़ना शुरू हो जाते हैं. जिस से प्राइवेट पार्ट का Eczema(खुजली )और एलर्जी हो जाती है. 
  4. जिनके खतने हो गए हों वह प्रइवेटपार्ट के कैंसर से बच जाते है.
  5. औरतों में इस का बहुत बुरा असर होता है. क्योकि यही बीमारी मर्दों के ज़रिये औरतों में प्रवेश कर जाते हैं.

उक्त बीमारियों के इलावा भी बहुत सारी बीमारियाँ हैं जिस का डर  हमेशा बना रहता है।  इस लिए मज़हबे इसलाम ने खतने का हुक्म देकर इंसानों को ऐसी खतरनाक जानलेवा बीमारियों से बचा लिया।

खतने के समय माता पिता क्या करे. ?

खतना अगर सातवें दिन हो रहा होता है तो अकसर माता या पिता ही अपने बच्चे को गोद में लेकर ही बैठते  है. वरना कोई कोई ज़रूरी नहीं है. कोई भी बच्चे को लेकर बैठ सकता है. और खतने के समय माता पिता या किसी एक को वहां पर रहना भी कोई ज़रूरी नहीं है. और न ही उस समय कोई खास काम करना ज़रूरी है.

क्या  खतना के बिना कुरान पढ़ सकते हैं?

बेशक खतने के बिना भी क़ुरान शरीफ पढ़ा जा सकता है. इसमें कोई हरज नहीं है.

नोट :- खतना या और किसी इस्लामी जानकारी प्राप्त करने लिये आप हमें ईमेल कर सकते है.





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