कुरान शरीफ, अठारहवाँ पारा, सूरह नूर आयत नंबर 30,31 में इस्लाम के मानने वाले मर्दो और औरतों से कहा गया '' मुसलमान मर्द और औरतें अपनी नज़रों को नीची रक्खें,और अपने शर्म गाहों (छुपाने वाले स्थानों ) की हिफाज़त करें. ये उन के लिये बहुत ही सुथरा है. बेशक अल्लाह इंसानो के तमाम कामों को देख रहा है. और अपने इज़्ज़त की हिफाज़त करें,और अपना बनाओ सिंगर न दिखायें,मगर जितना खुद ही खुला हुआ है,और दोपट्टे को
अपने गरेबानों पर डालें रहें. और अपना सिंगार जाहिर न करें,मगर अपने जीवन साथी (पति ) पर,
इस्लाम में हिजाब का मतलब
अल्लाह पाक ने किसी को भी किसी कपड़े में बांधा नहीं है. बस औरतों को अपनी इज़्ज़त की हिफाज़त के लिये गैर मर्दों से पर्दा करने का हुक्म दिया है. एक कपड़ा है उसे जैसी शक्ल देंगे वो वही कह लायेगा,जैसे कपडे को पैंट,जींस की शक्ल देंगे तो वो कपड़ा अब पैंट हो गया. वही कपडा कभी शर्ट बन जाता है,उसी कपडे को अगर लड़कियाँ ओढ़ ले तो डुपट्टा और उसी को चेहरे और सर में लपेट लो तो तो हिजाब हो गया। कपड़ा पूरी तरह से हिजाब ही है. हिजाब का तो मतलब ही होता है पर्दा करना.
मर्द भी हिजाबी है.
बोलो मेरे भाई क्या तुम कमर के निचले हिस्से को पर्दे में नहीं रखते हो. क्या तुम कमर के ऊपरी हिस्से को पर्दे में नहीं रखते हो. इतना तो हम मर्द भी करते है. बस हमारी मायें,हमारी बहनें चेहरे और शक्ल को भी ढांप लेती है. बस इसी पर इस क़दर वावेला, इतना शोर. हाय हम इनसान.हमारी अक़्ल को क्या हो गया है. कमर के नीचे पहनो तो वह कमर के निचले हिस्से का हिजाब है. कुर्ता और शर्ट की शक्ल देदो तो वह कमर के ऊपरी हिस्से का हिजाब है. चेहरे और सर में लपेट लो तो वह, वो हिजाब हो गया जिसे दुनिया ने मुस्लिम औरतों के लिए खास कर दिया है. कुल मिलकर हिजाब का मतलब होता है पर्दा करना,क़ुरान में सिर्फ परदे का हुक्म खुदा ने दिया है. पर्दा करो चाहे जिस तरह हो.ये तो हम दुनिया वालों ने इस कपड़े को अलग अलग नाम दे दिया है.
मोमिन मर्द अपनी नज़रों को नीची रखें.
दुनिया के बनाने वाले परवरदिगार आलम के सामने दुनिया का हर नशेबो फ़राज़ (ऊंच नीच,उतर चढ़ाओ )सब मौजूद था, वह देख रहा था कि इंसान दुनिया में औरतों के साथ क्या क्या कर सकता है. किस क़दर ज़ुल्मो ज्यादती कर सकता है. इस लिए खुदाए पाक ने औरतों और मर्दों दोनों को हुक्म दिया कि जब भी घर से बहार निकलो अपनी निगाहों को नीची रक्खो,रास्ता चलो,अपनी नज़रों को नीची रक्खो,बाज़ारों में जाओ अपनी नज़रों को नीची रक्खो,न किसी पर निगाह पड़ेगी न दिल में गन्दगी पैदा होगी,
ज़िना,बलात्कार,छेड़छाड़, तमाम तरह के गुनाहों का दरवाज़ा हमेशा हमेश के लिए बंद हो जायेगा. लेकिन इंसानो ने अपने रब के इस हुक्म के खिलाफ काम करना शुरू कर दिया,औरत मर्द दोनों ने खुदा के इस फरमान को ना इंसाफ़ी समझा और अपने आप को पैदा करने वाले रब से भी ज्यादा अक़लमंद, क़ाबिल, होशियार समझने लगे,
हिजाब (पर्दे) से विरोध का परिणाम
नतीजा हुआ की दुनिया में बलात्कार का ग्राफ बढ़ने लगा,ज़िना की ज़्यादती हो गई, लड़के और लड़कियाँ घर से फरार होने लगे. एक ख़ानदान दूसरे ख़ानदान,एक पड़ोसी दूसरे पड़ोसी का एक धर्म वाले दुसरे धर्म वालों का दुश्मन बनने लगा, और ऐसे काम करने वालों को फांसी की सजा होने लगी,संगसार किया जाने लगा, तरह तरह की सज़ायें होने लगी.
मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी
रब
का हुक्म न मानने का नतीजा (परिणाम)यह हुआ की खुदा ने दुनिया वालों पर ऐसा क़हर,ऐसा
अज़ाब नाज़िल किया (उतरा) कि सारी दुनिया हिजाब में आगई और वो अपने चेहरे और नाक को ढकने
लगे,हिजाब में भी नाक,चेहरा और बाल ही को ढका जाता है. मास्क से कम से कम आधा चेहरा तो ढक ही जाता
है.
ऐ दुनिया वालो,खुदा से बैर मत लो. अपने पैदा करने वालों से दुश्मनी मत करो. मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी का नारा मत लगाओ,उस समय मर्ज़ी कहाँ चली जाती है जब चेहरे पर झुर्रियां आने लगती है. उस वक़्त मर्ज़ी कहाँ चली जाती है जब जिस्म में कोई रोग लग जाता है. उस वक़्त मर्ज़ी कहाँ चली जाती है जब जिस्म से रूह (आत्मा )निकल जाती है। उस वक़्त मर्ज़ी कहाँ चली जाती है
इस लिये मेरा जिस्म मेरी मर्ज़ी का नैरा मत दो. साठ सत्तर वर्ष गुज़ारकर फिर उसी के पास जाना है.
प्राकृतिक हिजाब,
ये मास्क क्या है,प्राकिर्तिक हिजाब ही तो है. ये एक सजा ही तो है. खुदा के बनाये हुए क़ानून को तोड़ने की सजा ही तो है. रब के बनाये हुए उसूल को तोड़ने की सजा ही तो है. परवरदिगारे आलम के हुक्म के खिलाफ वर्ज़ी की सजा ही तो है.
0 Comments
Hello guys, let me know how the post is. And do share it among your friends. Thank you,
हेलो दोस्त , पोस्ट कैसी लगी ज़रूर बताएं, और अपने दोस्तों में ज़रूर शेयर करदें. धन्यवाद I