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AK WO LOG THE,HAAI KYA LOG THE.एक वो लोग थे, आह क्या लोग थे


 

One was those people, Haay what people were.

(एक वो लोग थे, हाय क्या लोग थे।)

प्यारे नबी मोहम्मद सल्लल लाहो अलैहे वसल्लम के एक साथी हैं] नाम है अबू दुजाना]बड़े नेक और बड़े ही ईमानदार] उनके ईमानदारी की मिसाल पेश नहीं की जा सकती] ये नमाज़ के भी बड़े पाबंद थे]पांचो वक़्त प्यारे नबी के पीछे नमाज़ें पढ़ते लेकिन इनका दस्तूर यह था कि यह ¼फज्र½भोर वाली नमाज़ पढ़ते और फ़ौरन उठ कर घर की तरफ चल देते,बाक़ी नमाज़ी नमाज़ के बाद भी महफिले नबवी में शरीक होते]और हुज़ूर की प्यारी प्यारी बातों को सुनते।

एक दिन कुछ लोगों ने अबू दुजाना की शिकायत प्यारे नबी से की] के अबु दुजाना नमाज के फ़ौरन बाद घर चले जाते हैं]महफ़िल में शरीक नहीं होते] फिर हुज़ूर ने अबू दुजाना से नमाज के फ़ौरन बाद घर चले जाने का कारण पुछा तो अबू दुजाना ने जो जवाब दिया वो ईमानदारी और बच्चों के अच्छी परवरिश की एक मिसाल बन गई]

ईमानदार अबू दुजाना (Honest abu dujana)

    अबू दुजाना ने फ़रमाया या रसूलल्लाह अभी खुजूर के फसल का वक़्त है पेड़ से खुजूर पक पक कर गिर रहे है. मेरे पडोसी के खुजूर के पेड़ से रात के सन्नाटे में परिंदे और चिड़यों की वजह से मेरे आँगन में गिर जाते हैं. मैं नमाज़ के फ़ौरन बाद इस लिए चला जाता हूँ कि अपने बच्चों के उठने से पहले मैं खुजूर चुनकर अपने पडोसी के घर पहुंचा दूँ ताकि मेरे बच्चे अपनी लाइल्मी की वजह से उस खुजूर को खा न लें जो उस के  लिए जायज नहीं है. मैं नहीं चाहता कि मेरे बच्चों के पेट में नाजायज़ चीज़ जाये।

प्यारे नबी ने इरशाद फ़रमाया,अबू दुजाना तेरी ये अदा अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त को इतनी पसंद आई कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त तुम से बहुत खुश है और तुम्हारे लिए दुनिया ही में जन्नत की बशारत दी जाती है.

ऐसा था मुसलमानों का अमल,

(Such was the practice of Muslims)

 ये है असल मज़हबे इस्लाम, और इस्लाम के मानने वाले मुसलमानो का अमल,ऐसा सबक़ दिया था हमारे प्यारे नबी ने. और ऐसी ईमानदारी का पाठ पढ़ाया था मज़हबे इस्लाम ने. लेकिन आज हमने अपना सब कुछ भुला दिया. वो मुस्लिम क़ौम जो अपने ईमानदारी की वजह से जानी और पहचानी जाती थी. जिसकी ईमानदारी की लोग कस्मे खाया करते थे. आज अपने अमल की वजह से दुनिया में ज़लीलो खार हो रहा है.

आज भी हो जो ब्राहीम सा ईमा पैदा.

(Even today if someone was as honest as Abraham.)

हालात आज भी बेहतर हो सकते हैं. दुनिया में आज भी हम अपना सर फख्र से ऊँचा कर सकते हैं. बस हमें अपने प्यारे नबी की बातों पर अमल करना है. उनकी सुन्नतों को अपनाना है. प्यारे नबी ने फ़रमाया तुम्हारे घर के चारो ओर चालीस चालीस घर तुम्हारे पड़ोसी हैं. अपने पड़ोसियों से मोहब्बत से पेश आओ,अख़लाक़ का मुज़ाहिरा करो,किसी भी तरह की तकलीफ अपने पड़ोसियों को न दो. हर हमेशा अपने पड़ोसियों का ख्याल रक्खो,देखो तुम्हारा कोई भी पड़ोसी भूका न सोने पाए. पड़ोसियों का हक़ अदा  करो चाहे वो किसी भी मज़हब का मानने वाला हो. वह बीमार हो जाये तो उनकी अयादत (देख रेख ) करो. और किसी भी चीज की ज़रुरत हो उसे पूरा करो.

अगर हमारा अमल सुन्नतों पर रहा,अगर हमने प्यारे नबी को अपना नामुनए ज़िन्दगी बनाया तो इंशा अल्लाह हम दुनिया में भी कामयाब रहेंगे और आख़ेरत में भी हमें अच्छा अज्र (बदला) मिलेगा.

आज भी हो जो ब्राहीम सा ईमा पैदा.

आग कर सकती है अंदाज़े गुलिस्तां पैदा.






 

 

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