मजहब इस्लाम की बुनियाद पांच चीजों पर है
.01. तौहीद. (यानी अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाना.)
02. नमाज़ यानि 24 घंटे में पांच मर्तबा अपने हाथ,पांव,को अच्छी तरह धोकर नमाज़ पढ़ना, ताकि कोई बीमारी न पकड़ ले. जिसे वज़ू कहते हैं.वज़ू का मक़सद बीमारियो से पाक रखना और नमाज़ अहम्मुल इबादात के साथ साथ कसरते बदन और ताज़गी है. की नमाज के बाद इंसान में काम करने की नयी उमंग और बदन में फुर्ती का जनम होता है.और इंसान बड़ी लगन और मेनत से काम में जुट जाता है.
03. रोज़ा,, रोजा कहते हैं सुब-हे -सादिक़ मतलत यह कि सूरज निकलने से लगभग दो घंटे पहले से लेकर सूरज के डूबने तक खाने पीने आदि से रुक जाना,
04. ज़कात का मतलब है अपने धन का कुछ हिस्सा ग़रीबों को देना। और जो पड़ोस में गरीब हैं उनकी मदद करना।
05. हज, यदि आपके पास पर्याप्त धन है जिसे आप आराम से अपने सफर का खर्च उठा सकते है,और सफर से आने तक आपके बच्चे आराम से घर में खा पी सकते हैं तो अपने जीवन में एक बार हज करें।
इस्लाम में रोजा रखने के लिए क्यों कहा गया.?
सबसे पहली बात तो यह है की जब मनुष्य के पास जो कुछ नहीं होता है तब उसे उसकी कदर मालूम होती है. जैसे माँ बाप की कदर उससे पूछो जिसके माता पिता का देहांत हो गया हो. रोटी की कदर भूकों से गरीबों से पूछो की रोटी की हकीकत क्या होती है इस्लाम की जो पाँच बुनयादी चीजें है उसे सही से समझने की ज़रुरत है. फास्टिंग के ज़रिये इंसानों को बताया गया है कि तुम्हारे बीच कुछ गरीब और भूखे लोग भी बसते हैं.रोज़ा रखकर उनके भूके होने का एहसास करो, अपने आप में मगन न रहो, अपने चारो तरफ दिखो कौन भूका है उसे अपने माल मेसे दो(ज़कात,सदकात,दान दो). ताकि वह भी एक अच्छी जिंदगी जी सके.
फ़ारसी भाषा में कहा गया अच्छी सेहत के लिए तीन चीज़ों का होना ज़रूरी है. कम गुफ्तन, कम बोलना कम खुरदन कम खाना, कम खुफ्तन कम सोना,अच्छी सेहत का राज़ थोड़ा खाना है. बहुत अधिक खाना खाने से कई तरह की बीमारियाँ होती हैं।
प्रिय नबी ने कहा,
उपवास रखो, तुम स्वस्थ रहोगे।कई किताबों में लिखा गया है कि रोजा हजारों बीमारियों का इलाज है।यही कारण है कि हर धर्म के विश्वासी अपने धर्म के अनुसार उपवास रखते हैं।
गांधी जी।
गांधीजी भूखे रहने के लिए प्रसिद्ध थे। वे कहते थे कि ज्यादा खाने के बाद व्यक्ति सुस्त हो जाता है सुस्त आदमी न ही दुन्या का है और न ही महाराज का,अगर आप शरीर को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो शरीर को थोड़ी खुराक दें, रोज़ा रखो, सारा दिन जाप अलापो. और फिर शाम को बकरी के दूध से रोज़ा खोलो।
चंद्र गुप्त मौरिया और चाणक्य जी महाराज
उन्हों ने कहा, मैंने भूखा रह कर जीना सिखा और भूखा रह कर उड़ना. मैंने दुश्मनो के चाल को भूखे पेट उल्टा
किया है.दुनिया के बड़े बड़े विद्यावानो ने रोज़ा रखा है. और इसे हजारों बीमारियों का इलाज बताया है.
सिकंदर आज़म और अरस्तू
दोनों यूनानी लीडर अपने फिल्ड के माहिर है, उन्होंने भूख और लगातार भूख को जिस्म की तवानाई के लिए ज़रूरी करार दिया है.
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय का आश्चर्य
प्रोफेसर मॉरपॉल्ड ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की पहचान है।उनका कहना है कि मजहबे इस्लाम ने अपने मानने वालों को इतना अज़ीम फार्मूला दिया है। अगर इस्लाम अपने मानने वालों को और कुछ न देता सिर्फ यही रोज़े का फार्मूला ही देता तो फिर भी इस
से बढ़कर उनके पास और कोई नेमत न होती. वो कहते हैं कि मै मेदे के वरम (stomach inflammation ) से परेशान था मैंने रोज़ा रखना शुरू किया
कुछ ही दिनों में कमी होने लगी फिर मैंने जिस्म में कुछ और तबदीली महसूस की , एक माह बाद पूरी तरह से फ़ीट हो गया.
प्यारे दोस्त,
आइये हम सब अमन शांति के साथ रहें। रमज़ान के महीने का एहतेराम करें। व्रत रखें। और उपवास रखने वालों की मदद करें।
Which date start in Roza?"
The question is, from which date the fasting is starting.Answer: In this year 2022, Insha Allah, the first fast will be on 3rd April 2022प्रश्न > जब मैं उपवास कर रहा था तो मुझे मासिक धर्म हो गया था उस समय प्रार्थना करने की
अनुमति नहीं है तो मैं अपना उपवास कैसे तोड़ सकता हूँ कोई सुझाव?
उत्तर
> उसी हालत में आज के रोज़े को पूरा करना बेहतर है. अगले दिन से रोज़ा न रखें.

Email.hmrizwanamani@gmail.com

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