जेल में अपने कर्मो की सजा काट रहे एक युवक की कहानी है, जिसने अपनी नेक पत्नी की हत्या कर दी। इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। यह लेखक की सोच पर आधारित एक कल्पना मात्र है।
आज मैं जेल में उम्र क़ैद की सजा काट रहा हूँ. और हर समय यही दुआ करता हूँ कि खुदा मेरे गुनाहों को माफ़ करदे और मुझे दुनिया से उठा ले. क्यों कि मैं एक क़ातिल हूँ. मैंने हत्या की है. और वह भी अपनी नेक और पारसा पत्नी का.
औरतों को मैं केवल एक खिलौना समझता था.बेड की शोभा और दिल बहलाने की वस्तु ही समझता था। खूबसूरत लड़कियों की ओर मैं बहुत जल्द आकर्शित हो जाता।
एक दिन मैं आफिस में बैठा फाइलों को उलट पुलट रहा था कि अचानक मेरी नज़र लेडी टाइपिस्ट पर पड़ी वह एक खूबसुरत नौजवान लड़की थी, कांधे तक तराशे हुए बाल,सफ़ेद जार्जट के सूट और गहरे रेशमी रंग के लाल दोपट्टे में वह निहायत खूबसूरत लग रही थी. जिस अंदाज़ के उसके बाल थे. जिस तरह उसने कपडे पहन रखे थे इस से उस के हुस्न में अधिक निखार पैदा हो गया था। बे इख़्तेयार
मेरे मुंह से निकल पड़ा सीमा ,
हाँ सीमा ही नाम था उसका. वह एक जानलेवा मुस्कराहट के साथ मेरे चैम्बर में दाखिल हुई।
यस सर ------- ओफ़ोह ---क्या तुम मेरे नाम से नहीं पुकार सकती.-------- ok सर.
और फिर जैसे उस के दिल में भी एक आग सुलग रही थी. वह बहुत जल्द मेरे क़रीब आगई। बड़े ऐशो आराम से ज़िन्दगी के पल गुज़र रहे थे ऐसा लग रहा था मनो ज़िन्दगी में बहार आ गई हो। लेकिन मै सीमा को अपनी बाँहों में सामना चाहता था,उस को मैं अपनी नज़रों से एक मिनट के लिए भी दूर नहीं होने देना चाहता था, एक रोज़ मैंने उसके गुलाब के पंखरी जैसे नाज़ुक होटों पर ऊँगली फेरती हुए कहा,
सीमा तुमने तो मुझ पर बिलकुल जादू कर दिया है. अगर मुझे तुम न मिलती तो, मैं फाइलों में गुम होता , तुम ने मेरे सरापा को एक नई ज़िन्दगी दी है. एक औरत मर्द को कितना जवान रखती है. ये आज मुझे महसूस हो रहा है औरत अगर मर्द से भरपूर मोहब्बत करे तो मर्द पर एक जादू सा चल जाता है. और फिर मर्द औरत का गुलाम बनकर रह जाता है.
सीमा जो अपने दोनों हाथों को अपने गालों पर रखे बड़े गौर से असगर की बातों को सुन रही थी. वह उसके हाथों को अपने हाथों में लेता हुए बोली।
आज मैं भी इसी तरह महसूस कर रही हूँ असगर , तुमने मेरी तरफ इतनी तवज्जो न की होती तो मेरे दिल की हालत भी अलग होती। मैं केवल तुम्हे इलज़ाम नहीं देती, इसका मतलब यह होगा कि मैं अपनी मोहब्बत का इज़हार न करूँ। मैं अपनी पूरी ज़िन्दगी और ज़िन्दगी का एक एक पल तुम्हारे नाम करने को तैयार हूँ. मुझे तुम पर पूरा भरोसा भी है.लेकिन फिर भी मेरा दिल डरता है. और खौफ से मेरा कलेजा काँप उठता है क्यों की तुम शादी शुदा हो तुम्हारे पास तुहारी पत्नी है. मैं तो केवल तुम्हारी ऑफिस में काम करने वाली एक मामूली टाइपिस्ट हूँ आखिर यह कैसे होगा.
सीमा की आँखे लाल हो गई थी आँखों से आंसू निकल कर गुलाबी गलों पर फिसलने लगे थे. वह तड़प उठा. किसी और जगह होता तो उसकी आँखों से अपना होंठ लगाकर सTरे खौफ पी जाता लेकिन आस पास बहुत सTरे लोग महवे गुफ्तगू थे,फिर भी उसने उसका हाथ पकड़ लिया और हाथों को दबाते हुए बोला।
घबराओ नहीं सीमा, तुम तो मेरी ज़िन्दगी और मेरी कायनात हो. कोई न कोई हल ज़रूर निकलेगा।
क्या हल निकलोगे असगर, मेरा दिल जब तुम से मिलने के लिए बे क़रार है तो तुम हल निकलने की बातें कर रहे हो.
क्यों न सीमा आज रात का खाना हम होटल में एक साथ खायें। असग़र अपने आप को काबू में करते हुए कहा और सीमा के हाँ करते ही दोनों होटल के तरफ चल पड़े.
कमरा बुक हो चूका था. रूम में प्रवेश होते ही असग़र ने सीमा को अपने मज़बूत बाँहों में जकड लिया।
अब यहाँ कोई नहीं है सीमा, आओ आज हम एकदूसरे में समां जाएँ.
इतनी भी क्या जल्दी है असग़र, अभी तो सारी रात बाकी है. ये मेरे गाल, ये रसीले होंट,ये मेरी जवानी सब कुछ तो तुम्हारे लिए ही है ना यह तो तुम्हारी अमानत है.
पहले उस कांटे को तो नकाल फेंको जो हमारे बीच दीवार बन कर खड़ी है.
उसकी फ़िक्र तुम क्यों करती हो सीमा, मैं तो तुम्हारे लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने को तैयार हूँ. जैसा तुम चाहोगी वैसा ही होगा.
तो जाओ असगर, आज हमेशा के लिए उस दीवार को गिरादो जो हमारे दरमियान खड़ी है।
आज भी वह काली रात हमें अच्छी तरह याद है,मैं सीमा की बातों में आकर अपनी बीवी का काम तमाम करने निकल पड़ा. फ़ज़ा में एक चीख उभरी और हमेशा के लिए खामोश हो गई. मैं पीछे मूड कर भी न देखा और दौड़ता हुआ सीमा के पास होटल की तरफ निकल पड़ा. कमरा बिलकुल खली था. सीमा का कहीं पता न था. कागज़ का एक टुकड़ा बेड पर रखा था जिस पर बड़ी तेज़ी से मेरी नज़र फिसलने लगी.
असग़र जिस तरह तूने मुझे फंसाकर मेरी इज़्ज़त से खेलना चाहा इसी तरह तूने कितनी लड़कियों की इज़्ज़तों को लूटा है, और न जाने कितनी मासूम लड़कियों को बर्बाद किया है.
जानते हो उन तमाम लड़कियों में एक मेरी बहन रेहाना भी थी, तूने उसे अपनी मोहब्बत के जाल में फांस कर उस की इज़्ज़त से खूब खेला और शादी का वादा करके तूने उसे खूब बेवक़ूफ़ बनाया, और जब उस के पेट में तेरा नाजायज़ बच्चा पलने लगा तो तूने उसे नौकरी से निकल दिया.
जानते हो वह हर समय तुम्हारा ही नाम लेती और आंखे फाड़ फाड़ कर तुम्हारा इंतज़ार करती रहती, शायद तुम आओ गे, और उसे दुल्हन बनाकर लेजाओ गे , लेकिन तुम्हे न आना था न आये. गांव मोहल्ले के लोग उसे ताना देने लगे थे.,, न जाने पेट में किसका पाप पाल रही है. बेहया बे शर्म कहीं की , लोगों का ताना सुनते सुनते वह बीमार रहने लगी. शर्म के मारे उसने घर से निकलना बंद कर दिया था.दिन ब दिन वह बीमार और कमज़ोर होती चली गई और फिर एक दिन हम सब को रोता छोड़ कर इस धोके बाज़ दुनिया को अलविदा कहा और रुखसत हो गई।
मै उसी रेहाना की बहन सीमा हूँ. मैंने क़सम खाई थी की जिसने भी मेरी बहन को बर्बाद किया है मैं उस से बदला लेकर रहूंगी, आज मेरा बदला पूरा होगया असगर, मुझे यक़ीन था की तुम नई जवानी का रस चूसने के लिए कुछ भी कर सकते हो. अब जाओ अपने किये की सजा भुगतने के लिए तैयार रहो.
खत पढ़कर मेरा वुजूद काँप उठा था. सारा नशा काफूर हो चूका था. सचमुच रेहाना के साथ मैने बड़ा ज़ुल्म किया था. अब मैं अपने तमाम गुनाहों के साथ अपनी पत्नी का कातिल भी था. सो आज मैं जेल की सलाखों के पीछे अपने गुनाहों की सजा काट रहा हूँ.

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