फूल तुम्हे भेजा है खत में .......
क्या लिखूं यही की आज वो बहुत खूबसूरत लग रही थी. गुलाबी रंग पे ग्रीन ड्रेस और उसी से मेल खता हुआ दोपट्टा तो मज़ीद क़यामत ढा रहा था. हाँ रूपा, जब तुम्हे देखा तो देखता ही रह गया। निहायत खूबसूरत सा चेहरा,गोल आरिज़ साफ़,उस पर आँखें मोटी रसीली,पुतलियां स्याह, होंठ निहायत मौज़ूं और क़द्रे खमीरा,लम्बी स्याह ज़ुल्फ़ें जो बहुत क़रीने से शानू पे लहरा रहे थे. तुम निहायत ही हसीन लग रही थी रूपा, बिलकुल हूर, हूर जैसी, मै क्या मेरी जगह कोई भी होता तो दिल थाम कर रह जाता.
उसी रोज़ से तुम्हार खूबसूरत सा चेहरा मेरे तसव्वरात में घूम रहा है. मेरे खाबों और ख्यालों पर राज कर रहा है. दिल तो बीते हुए समय में कितनी बार उकसाया कि मैं तुम्हारे सामने अपनी मोहब्बत का इज़हार करदूँ, और थामलू तुम्हारे हाथों को हमेशा के लिए,लेकिन जब भी अपने दिल की आवाज़ को ज़बान से अदा करने का इरादा किया तो न जाने क्यों मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा, आखिर क्यों रूपा ऐसा क्यों होता है. शायद यही कि मैं तुम्हें दिल की गहराइयों से चाहने लगा हूँ.
उस रोज़ जब आसमान पे हलके हलके बादल एक दुसरे से अठखेलया कर रहे थे,और सूरज दिन भर की यात्रा करने के बाद अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रहा था उस समय मैं तुम्हारे घर सिर्फ और सिर्फ एक ही इरादे से गया था ताकि मैं तुम्हे अपने दिल के फैसले से आगाह कर सकूं.
परन्तु जूंही अपनी मुहताजी और गरीबी के एहसास ने करवट बदला तो मेरा वजूद कांप कर रह गया,और अंतरात्मा से यह आवाज़ निकली, बड़े ही नादान हो शम्स, अरे तुम कहाँ जा रहे हो. ये भी तुम्हे खबर है कि रूपा एक बड़े बाप की शहज़ादी है. और तुम, तुम तो खुद जानते हो क्या हो. क्यों जान बूझ कर रुस्वा होने पर तुले हो. अरे वह लोग नहीं अपनाएंगे तुम्हे. सब से पहले तो रूपा ही रिजेक्ट कर देगी, औरों की बात तो दूसरी है. तुम्हारे और रूपा के बीच एक बहुत बड़ी दिवार खड़ी है. और वह दिवार है दौलत की. ये मालो ज़र, ये दौलत बहुत ही बुरी चीज होती है. तुम नहीं जानते कि इस दिवार ने अपने अंदर कितने प्रेमियों को समो लिया है. कितने मोहब्बत करने वालों का खून कर डाला है। न जाने कितने प्यार करने वालों को हमेशा के लिए एक दुसरे से जुदा कर डाला है. ये सब जानते हुए भी तुम उनलोगों के सामने ज़लीलो खार होना चाहते हो. रुस्वा होना चाहते हो. झटक कर फ़ेंक दो इस मोहब्बत को. दिल से निकाल दो इस प्यार को,और कोई दूसरा दर तलाश करो, जो तुम्हारे मुक़ाबले का हो, जो तुम्हे प्यार दे सके. तुम्हारी मोहब्बत का स्वागत कर सके. हाँ रूपा, मुझे मेरी आत्मा ने बहुत रोका। हज़ारहा मना किया, लेकिन क्या करूँ , दिल पर किसका ज़ोर चला है.
खुदा ने मुझे खूबसूरत नहीं बनाया जिस तरह तुम्हे बनाया है, और न ही मालो ज़र (दौलत) से नवाज़ा जिस तरह तुम्हे नवाज़ा है. ये जानते हुए भी तुम्हारी मीठी आवाज़ मेरे कानो को पसंद आगई,तुम्हारा खूबसूरत चेहरा मेरी नज़रों को भा गया,और मेरा दिल एक न मिलने वाली शै (वस्तु)की तमन्ना करने लगा,इस सिलसिले में हम उस जुवारी की तरह हो गए जिसकी लालच इतनी ही बढ़ती जाती है जितना वो हारता जाता है और लालच करता रहता है. यहाँ तक कि उसका हाथ हर चीज़ से खiली हो जाता है. प्रन्तु वह जुवारी लालच करता है मालो ज़र जीतने का और एक मोहब्बत करने वाला लालच करता है मोहब्बत जीतने का,
तुम यह मत समझ लेना की मैं तुम्हारे मालोज़र से मोहब्बत करता हूँ और इसी कारण तुम्हे चाहने लगा हूँ. मैं तो सिर्फ और सिर्फ तुम से मोहब्बत करता हूँ रूप, सिर्फ तुम से. अगर यक़ीन न आये तो अपने हवेली और उसकी एक एक ईंट से पूछ लेना. घर में मंडराते हुए हवाओं के कण कण से पूछ लेना. हर एक की ज़बान से एक ही आवाज़ आये गी कि शम्स तुम्हे दिल की गहराइयों से चाहता है. और तुम से बेपनाह मोहब्बत करता है. लेकिन उसकी आवाज़ तुम्हे तब सुनाई पड़ेगी जब तुम्हारे दिल में मोहब्बत होगी. क्यों कि बेजान शै (वस्तु) की आवाज़ को वही सुन सकता है जिसका दिल मोहब्बत से लबरेज़ (भरा)होता है.
जिस दिन मैं अपनी मोहब्बत को पामाल (खत्म) और अपने रिश्ता आरज़ू को मुनक़ता (समाम्प्त) होते हुए महसूस करूँ खुदा से दुआ हैं कीं वह मेरी ज़िन्दगी का आखरी दिन हो. इस लिए कि उस ज़िन्दगी में कोई खैर (अच्छाई) नहीं जिसमे इंसान बगैर दिल के ज़िंदा रहे. और उस दिल में कोई खूबी नहीं जो बगैर मोहब्बत के धड़के,अगर तुम्हारे दिल में मोहब्बत है रूपा, तो डरो मत उस बाप से जिसकी तुम बेटी हो. उन लोगों से जो तुम्हारे पड़ोसी हैं.उन मिलने वालों से जो तुम्हारे रिश्तेदार है, और न ही इस राह में खुदा के खौफ से गज़ब खाओ,
तुम्हे मालूम होना चाहिये कि जिस तरह खुदा ने सूरज को पैदा कर के उसे ताबिश (चमक) दी, फूल को पैदा करके उसे खुशबू,जिस्म को पैदा करके उसे रूह,आँख को पैदा करके उसे रोशनी अता की है.बिलकुल इसी तरह दिल को पैदा कर के इसे मोहब्बत की दौलत से नवाज़ा है. फिर चाहे वह दिल किसी ग़रीब का हो या बादशाह का.
फिर ये कि खुदा किसी भी चीज़ को बरकत नहीं देता जितनी दो मोहब्बत करने वाले पाक दिलों को देता है. इस लिए कि वो मशीयत की तामील में मोहब्बत करते है. और उस की सुन्नत पर अमल करके पैमाने वफ़ा बांधते है.
मेरा यह लेख पढ़कर शायद तुम्हें बुरा भी लगे, और बेखुदी में मुंह से कुछ निकल भी जाये, मेरे इस जुरअत की वजह से. लेकिन इसको माफ़ कर देना. जो भी दिल चाहे बोल लेना.लेकिन दिल मत तोडना रूपा. दिल मत तोडना. मै ग़रीब ज़रूर हों लेकिन दिल का नहीं.
मेरे दिल की सिर्फ एक ही तमन्ना है कि तुम मेरे ख्वाबों की ताबीर बनकर मेरे पास आ जाओ और बस। फ़क़त तुम्हारा और केवल तुम्हार शम्स।



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