कभी वह अंग्रेजी और गणित का एक मझा हुआ शिक्षक था. छात्रों की भीड़ हर समय उसे घेरे रहती. रास्ता चलते जब उसका छात्र, पाऊ छूकर प्रणाम करता तो उस का सीना फ़ख्र से चौड़ा हो जाता.
फिर वह हेडमास्टर बन गए. अच्छी सैलरी के साथ साथ ऊपरी आमदनी से भी जेब गर्म होने लगा. लोग उसे देख कर उसकी किस्मत पर रश्क करते.
काश मैं भी ऐसा होता....
उसकी पत्नी उसे कितना चाहती है......
जब तक वह विद्यालय से नहीं आजाता पत्नी खाना तक नहीं खाती.
बेटे हाथ बांधे खड़े रहते है. पता नहीं कब पिता जी को किस चीज की ज़रुरत पड़ जाये.
तरह तरह की बातें लोग उनके बारे में करते.
बेटे,पत्नी, बहुएं सभी हर समय उनकी आओ भगत में लगे रहते। गाऊँ की गलियों और शहर के बाज़ारों से जब उनका गुज़र होता तो लोग उनके स्वागत में खड़े हो जाते.
परन्तु आज उनकी हालत देख कर मेरा कलेजा मुँह को आरहा था, मैं उनकी बिमारी का सुनकर उनसे मिलने गया था.
पहली नज़र में तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ, यह वही मास्टर इमरान हैं जिनके विद्यालय प्रवेश मात्र से सन्नाटे का वातावरण हो जाया करता था. परन्तु ग़लत काम का ग़लत नतीजा ही होता है.
ऊपरी कमाई से जेब गर्म करके धन इकठ्ठा करना और अपने बच्चो की हर जाएज़ नाजायज़ मांगों को पूरा करना एवं दूसरों के हक़ को मरकर दौलत जमा करना नासूर बनकर जिस्म को घुला देता है. और यही सब कुछ हो रहा था मास्टर इमरान के साथ.
इतने बड़े बंगले के एक कोने में चटाई पर पड़ा हुआ केवल इंसानी ढाँचा दिखाई दे रहा था. अंदर धसी हुई आँखें हर आने जाने वालों को हसरत भरी निगाहों से देख रही थी.
अरे सर, आप की यह हालत कैसे हो गई. मैं उनकी ओर देखते हुए पुछा.
आह, ज़फर बाबू क्या बताऊँ आपको.
एक बहुत ही कमज़ोर और हलकी आवाज़ मेरे कानो से टकड़ाई,
उनके हाथ हलकी हरकत के साथ मेरी ओर बढे. शायद वह मेरे हाथों को अपने हाथों में लेना चाहते थे. मैंने अपना हाथ उनकी ओर बढ़ा दिया. फिर वह बहुत ही कमज़ोर और धीमी आवाज़ में बोलने लगे.
1ज़फर, जानते हो. इस माकन को बनाने के लिए मैंने क्या क्या नहीं किया. अपने बच्चो की इच्छाओं को पूरा करने के लिए मैंने क्या क्या जातां नहीं किये. जाएज़ नाज़ायज़ सब कुछ मैं भूल गया था. पैसा हो चाहे जैसा हो. बस किसी तरह धन जमा करना है बस यही हर समय मैं सोंचता था. ग़लत रस्ते से मैं ने बहुत धन इकट्ठा किया.
नतीजा तुम्हारे सामने है. आज मेरा इस धरती पर कोई नहीं है. जमा किया हुआ सारा धन, धरा का धरा रह गया है. बेटे , बहुवें यहाँ तक की पत्नी भी आज मेरे मरने की दुआएँ कर रही है. इतना बड़ा बोझ हो गया हूँ मैं.
जिस्म का एक एक अंग नाकाम हो चूका है. कोई देखने और पूछने वाला नहीं है. मौत भी रास्ता भूल चूका है. खाने तक के लिए कोई नहीं पूछता. सब अपने अपने कामो में लगे है. कोई किसी को जवाब देने को तैयार नहीं. वह पत्नी जो दिन दिन भर मेरे इंतज़ार में भूके रह जाती थी आज उसने भी मुंह फेर लिया है. एक तो जो बीमारी है सो है ही ऊपर से अपनों की बे रूखी ने दिल को टुकड़े टुकड़े कर दिये है।
बीमारी जो है उसका तो इलाज हो रहा है लेकिन लेकिन ये अपने जो बेगाने बन चुके हैं उसका क्या इलाज होगा. मुझे विश्वास ही नहीं बल्कि पूरा यकीन है की मुझे मेरे किये की सजा मिल रही है. काश मै माया मोह में न पड़ता और ईमानदारी से काम करता तो आज मुझे ये परेशानिया झीलनी नहीं पड़ती.
बोलते बोलते उनका गाला सूख रहा था, बड़ी हलकी आवाज़ उनके मुंह से निकल रही थी,आँखों से आंसुओ के सैलाब जारी थे. वह मेरा हाथ पकड़ कर बच्चों की तरह रोने लगे थे. मैं भी अपने आपको रोक न सका,मेरे आँखों से आंसू बहकर मेरे चेहरे पर फैल गए.
,,देखा जाये तो दुनियां का हर इंसान दुःख के बोझ तले दबा है. कुछ दुःख ऐसे होते हैं जो वजूद को अंदर ही अंदर चाट कर खोखला कर देते है. ये कितनी अजीब बात है कि हम चाह कर भी दूसरों की दुःख दर्द को बाँट नहीं सकते. जिन दुखों को थपक थपक कर सुलाने की कोशिश करो ज़रा सी ठेस लगते ही जग जाते हैं.
जिन ज़ख्मों को टाँका टाँका कर के सियो ज़रा सी रगड़ से टूट जाते हैं. तब अरसे की मेहनत अकारत हो जाती है. बहता हुआ लहू आँखों में सिमट आता है. ऐसा लगता है मौत आती है पर नहीं आती. ज़िंदा रहने के लिए उनको दोबारह सीना पड़ता है. इसी तरह दिन गुज़ारे जाते हैं,,
ज़फर, फिर उनकी दर्द भरी आवाज़ मेरे कानो से टकड़ाई,ज़िन्दगी में कभी भी माया मोह में मत पड़ना. अपना काम ईमानदारी से करना. कभी किसी का हक़ मत मरना, समय अच्छा है तो सब लोग साथ रहेंगे बुरे वक़्त का साथी कोई नहीं है.
ग़लत तरीके से कमाई हुई दौलत कुछ काम की नहीं होती. बीमारी पट जाने के डर से कोई तुम्हारे पास बैठने के लिए तैयार नहीं होगा. टकटकी बांधे चटाई पर पड़े पड़े तुम हसरत भरी निगाहों से अपनों को देख कर आँसू बहाते रहोगे.
उनके होंठ कांपने लगे थे. आंसू थे जो रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. मैंने इशारे से उन्हें खामोश कराया और तसल्ली दी और फिर भारी क़दमों के साथ उनसे रुखसत हो गया.


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